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तटीय समुदायों की जलवायु सुरक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

नई दिल्ली में पर्यावरण मंत्रालय की दो-दिवसीय कार्यशाला तटीय योजना में जलवायु जोखिम के आकलन को शामिल करने और संवेदनशील समुदायों व पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर केंद्रित है।

तटीय समुदायों की जलवायु सुरक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

नई दिल्ली में पर्यावरण मंत्रालय की दो-दिवसीय कार्यशाला तटीय योजना में जलवायु जोखिम के आकलन को शामिल करने और संवेदनशील समुदायों व पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर केंद्रित है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 29 अक्टूबर को नई दिल्ली में तटीय लचीलापन विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की। दो-दिवसीय आयोजन भारत के तटीय समुदायों की जलवायु सुरक्षा पर केंद्रित ग्रीन क्लाइमेट फंड परियोजना के तहत हो रहा है।

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मंत्रालय के अनुसार, परियोजना में मैंग्रोव, तटीय जलग्रहण क्षेत्र, समुद्री घास, नमक-दलदल और प्रवाल भित्तियों जैसे पारिस्थितिकी तंत्रों के साथ संवेदनशील तटीय इलाकों के लोगों की आजीविका पर भी ध्यान है। उद्घाटन सत्र में पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि तटरेखा में बदलाव, खतरे की सीमा और भेद्यता संबंधी आकलनों को राज्य, जिला और स्थानीय स्तर की योजना व निवेश में उपयोग किया जाना चाहिए। कार्यशाला 30 अक्टूबर तक चलेगी।

स्रोत: संबंधित मंत्रालय / पीआईबी। मूल विज्ञप्ति: 29 October 2026 at 5:56 pm IST। https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2330131

चित्र: संबंधित मंत्रालय / पीआईबी, आधिकारिक विज्ञप्ति के साथ प्रकाशित।

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